भिंड एसपी पर गंभीर आरोप, सस्पेंड होंगे या हटेंगे !

ताका झाकी हमारा शहर

भिंड पुलिस अधीक्षक नागेन्द्र सिंह पर रेत माफियाओं से मिली भगत और थानेदारों से कथित वसूली के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। उन्हें सस्पेंड किया जाए या भिंड से हटाया जाए इसे लेकर भिंड से भोपाल तक विचार-विमर्श जारी है। बताया जाता है कि गुरुवार को मुख्यमंत्री ने उन्हें सस्पेंड करने के मौखिक निर्देश दिए थे। मंत्रालय का गृह विभाग देर रात तक लिखित आदेश का इंतजार करता रहा। बताया जाता है कि भिंड से भोपाल तक इस मामले में हड़कंप मचा हुआ है। सरकार तय नहीं कर पा रही एसपी को हटाया जाए या निलंबित किया जाए, लेकिन यह तय है कि मुख्यमंत्री और गृह मंत्री दोनों ही एसपी से बेहद नाराज हैं।
सीधी भर्ती के आईपीएस नागेन्द्र सिंह को कमलनाथ ने श्योपुर से भिंड का पुलिस अधीक्षक बनाया था। श्योपुर में नागेन्द्र सिंह का गनमेन और वाहन चालक अवैध तरीके से भिंड में थाना प्रभारियों से वसूली करते घूमते थे। चंबल डीआईजी राजेश हिंगणकर ने गनमेन प्रधान आरक्षक मुकेश राजावत और चालक आरक्षक आशीष शर्मा को थाना प्रभारियों से वसूली के लिखित आरोप लगाकर निलंबित कर दिया। इसके बाद भोपाल में खबर पहुंची कि भिंड में पुलिस के संरक्षण में अवैध रेत खनन चल रहा है। डीआईजी ने एसपी से कार्रवाई को कहा तो एसपी ने कार्रवाई नहीं की। बताया जाता है कि भोपाल के आदेश पर डीआईजी राजेश हिंगणकर ने 12, 13 मई को रेत खदानों पर छापा मारकर पोकलेन मशीनें जब्त की और रेत निकालने की पनडुब्बी को भी जलवा दिया। इसके बाद भी अवैध रेत नहीं रुकी तो 2 कुछ दिन पहले डीआईजी ने छापा मारकर थाना रौन, उमरी, अमायन के थाने प्रभारियों को निलंबित कर दिया। इसके बाद डीआईजी ने तीसरा छापा 27 मई को डाला और 60 लाख रुपए की 19 हजार घनमीटर अवैध रेत का भंडारण पकड़ा। इसके बाद डीआईजी ने भारौली और लहार थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया। भाजपा के पूर्व विधायक रसाल सिंह ने इन थाना प्रभारियों का समर्थन किया तो राज्य सरकार ने इन सभी का भोपाल पुलिस मुख्यालय में तबादला कर दिया है।
आज होगा अंतिम निर्णय
बताया जाता है कि आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कटनी से लौटने के बाद अंतिम निर्णय लेंगे कि भिंड एसपी को निलंबित किया जाए या उनका तबादला होगा। इसके अलावा यह भी खबर है कि चंबल के एडीजी डीपी गुप्ता को भी हटाया जा सकता

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