चार दशक बाद ग्वालियर अंचल में कांग्रेस की गुटबाजी खत्म, बनेंगे नए समीकरण

राजनीतिक
  1. कांग्रेस को ठुकराकर प्रदेश में तख्ता पलट करने और अब भाजपा में जमीन मजबूत करने निकले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अंचल की राजनीति में कई नए समीकरण खड़े कर दिए हैं। उनके निर्णय से अंचल में चार दशक बाद कांग्रेस की गुटबाजी को फिलहाल विराम लग गया है।

वैसे तो कई जन्मजात कांग्रेसी भी सिंधिया के साथ चले गए हैं, लेकिन जो बचे हैं वे अब उन्हें सबक सिखाने की शपथ ले रहे हैं। इसके लिए मोर्चा संभाला है उनके धुर विरोधी दिग्विजय सिंह ने। कमल नाथ पीछे हट गए हैं। कारण यह कि अंचल में कमल नाथ के समर्थक ही नहीं है। सिंधिया के विरोध में भाजपा के सदस्यता अभियान के पहले दिन कांग्रेस ने जो शक्ति प्रदर्शन किया, उसकी पटकथा दिग्विजय सिंह ने तैयार की थी।

पहले माधवराव-अर्जुन, फिर ज्योतिरादित्य-दिग्विजय में जंग

चार दशक पहले 1980 में प्रदेश में ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया और अर्जुन सिंह का बोलबाला था। दोनों कद्दावर थे और केन्द्र तक धमक थी। अर्जुन सिंह 1980- से 85 तक मुख्यमंत्री रहे तो उन्होंने अंचल में अपने समर्थकों की भी फौज खड़ी कर दी थी।

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